औद्योगिक क्रान्ति का प्रारंभ | औद्योगिक क्रान्ति की परिभाषा/कारण/प्रभाव/लाभ ( 1750 से 1850 )

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औद्योगिक क्रान्ति का प्रारंभ | औद्योगिक क्रान्ति की परिभाषा/कारण/प्रभाव/लाभ ( 1750 से 1850 )

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Start of Industrial Revolution | Definition/Cause/Effect/Benefit of Industrial Revolution 

(1750 to 1850)

औद्योगिक क्रान्ति  का प्रारंभ | औद्योगिक क्रान्ति की परिभाषा/कारण/प्रभाव/लाभ ( 1750 से 1850  )

औद्योगिक क्रान्ति 


औद्योगिक क्रान्ति का प्रारंभ | Start of industrial revolution

(Aadyogik kranti ka prarbha) 

"औद्योगिक क्रान्ति' शब्द का प्रयोग फ्रांस के समाजवादी नेता ब्लेनकुई ने 1837 ई. में किया। सर्वप्रथम इंग्लैण्ड में 1750 से 1850 की अवधि में औद्योगिक क्रान्ति हुई, किन्तु शीघ्र ही स्पेन फ्रांस, बेल्जियम, जर्मनी, इटली, स्वीटजरलैण्ड, हॉलैण्ड, स्वीडन, आस्ट्रीया,रूस आदि यूरोपीय देशों तथा अमरीका एवं जापान में भी इसका प्रसार हो गया।

क्रान्ति का अर्थ होता है परिवर्तन या किसी व्यवस्था को नष्ट करके उसके स्थान पर एक नवीन व्यवस्था का स्थापित होना । औद्योगिक क्रान्ति का अर्थ है:- उद्योगों की प्राचीन परम्परागत व्यवस्था के स्थान पर वैज्ञानिक तथा तीव्र गति से उत्पादन करने वाले यंत्रों का प्रयोग कर एक नवीन व्यवस्था का जन्म होना। औद्योगिक क्रान्ति का संबंध मुख्यतया उत्पादन प्रणाली से था । मनुष्य ने अपने अनुभव व ज्ञान के विकास के साथ-साथ औजारों व उत्पादन के ढंग में परिवर्तन किए। पहले औजार बहुत घटिया किस्म के थे, जिससे उत्पादन कम होता था। परन्तु नवीन यंत्रों का अविष्कार हो जाने से उत्पादन के तरीके पूर्णतया बदल गए। इन क्रान्ति या परिवर्तन ने यूरोप केआर्थिक व सामाजिक क्षेत्र को पूर्णतया बदल दिया ।

औद्योगिक क्रान्ति की परिभाषा | Definition of industrial revolution

(Aadyogik kranti ki pribhasha

औद्योगिक क्रान्ति का अभिप्राय उन परिवर्तनों से है जिन्होंने यह संभव कर दिया है कि मनुष्य उत्पादन के प्राचीन उपायों को त्यागकर बड़े पैमाने पर विशाल कारखानों में वस्तुओं का उत्पादन कर सके।  डेविस

इस प्रकार औद्योगिक क्रान्ति से आर्थिक, व्यापारिक और कृषि संबंधी क्रान्ति का भी घनिष्ट संबंध है। इस प्रक्रिया में विभिन्न प्रकार के खनिज पदार्थों, विशेषतया कोयला व लोहा तथा शक्ति के विभिन्न साधनों जैसे- भाप और जल तथा बिजली के अतिरिक्त बड़े पैमाने पर श्रमिकों की , विशालकाय यंत्रों का निर्माण, वैज्ञानिक पुस्तकों की उपलब्धि इत्यादी अनेक तत्वों का महत्व है। सीमित अर्थों में औद्योगिक क्रान्ति यांत्रिक क्रान्ति है। नये-नये यंत्रों के निर्माण से आवागमन और संदेश वहन के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ।  

औद्योगिक क्रान्ति के कारण | Due to industrial revolution

( Aadyogik kranti ke karan kya hai)


(1) विदेशी बाजार की आवश्यकताओं की पूर्ति:- आधुनिक युग के आरंभ में यूरोप के लोगों में अमेरिका और एशिया के नये बाजारों की मांग को पूरा करने के लिए औजारों तथा उत्पादन के तरीकों में उन्नति करने की इच्छा उत्पन्न हुई।

(2) विशाल पूँजी की उपलब्धि:- 1757 ई. में ब्रिटेन की ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला को हराकर बंगाल, बिहार और उड़ीसा सूबो पर अधिकार कर लिया और इन सूबों से प्राप्त धन को अपने उद्योग की पूँजी बनाया।

(3) सस्ते मजदूरों की प्राप्ति:- कृषि दासता समाप्त हो जाने के कारण उस समय इंग्लैण्ड में सस्ते मजदूर पर्याप्त संख्या में मिल जाते थे।

(4) कच्चे माल की प्राप्तिः- ब्रिटेन को कच्चा माल अपने उपनिवेशकों से प्राप्त हो जाता था।

(5) अनुकूल परिस्थितियाँ:- औद्योगिक क्रान्ति के लिए ब्रिटेन में माल बेचने के लिए विदेशी बाजार और विकसित समुद्री बेड़ा जैसी अनुकूल परिस्थितियाँ थीं।

औद्योगिक क्रान्ति का आर्थिक तथा सामाजिक जीवन पर प्रभाव 

Impact of Industrial Revolution on Economic and Social Life

(Aadyogik krani ka aarthik jeevan ttha samajik jeevan pr prbhav )

(अ) आर्थिक जीवन पर प्रभाव

1. मनुष्य की सुख-सुविधाओं में वृद्धि हुई।

2. विभिन्न देशों के बीच गहरे आर्थिक संबंध कायम हुए।

(ब) सामाजिक जीवन पर प्रभाव

1. नये वर्गों की उत्पत्ति और उनके बीच संघर्ष - औद्योगिक क्रान्ति ने सम्पूर्ण बीसवीं सदी में विश्व समाज को दो वर्गों में विभाजित कर दिया। मजदूर तथा पूँजीपति वर्ग- इससे वर्ग संघर्ष को जन्म मिला।

2. स्वतंत्र दस्तकारी तथा अन्य बेकारी में वृद्धि - मशीनों से तैयार माल अच्छा और सस्ता होता था। इसलिए हाथ से काम करने वाले कारीगर उद्योगपतियों के साथ होड़ में टीक नहीं सके। उन्हें अपना स्वतंत्र धंधा छोड़कर कारखानों में जाना पड़ा। मशीनों के प्रयोग से मनुष्य के श्रम की आवश्यकता कम हो गयी। इससे बेकारी में वृद्धि हुई।

3. पारिवारिक जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ा:- संयुक्त परिवार बिखर गया कम आय के कारण। परिवार के स्त्रियों और बच्चों को भी कारखानों में काम करना पड़ा। घर में छोटे-बच्चों एवं बूढ़ों की सही देखभाल नहीं हो सकी।

4. नगरों का विकास:- जिन स्थानों तथा जिलों में बहुत ज्यादा मात्रा में लोहा तथा कोयला उपलब्ध था। वे शीघ्र ही उद्योगों के केन्द्र बन गए। इससे गांवों को छोड़कर लोग बड़ी संख्या में शहरों की तरफ जाने लगे।

5. शहरों में नैतिक पतन तथा अपराधों में वृद्धि - कारखानों में काम करने वाले मजदूरों की दशा बहुत बुरी थी। कम वेतन 20 घण्टे काम करना, भोजन, कपड़ा, मकान की खराब व्यवस्था एवं दबाव की कमी से मजदूरों का स्वास्थ्य घटने लगा। इससे उनका नैतिक पतन भी हुआ।

औद्योगिक क्रान्ति से विश्व को लाभ 

The world benefits from the Industrial Revolution

( Aadyogik Kranti Se Vishv Ko labh )

(1) औद्योगिक विकास - इंग्लैण्ड की औद्योगिक क्रान्ति से प्रेरित होकर विश्व के

अन्य देशों ने भी अपने यहां औद्योगिक विकास किया।

(2) आविष्कार को प्रोत्साहन: औद्योगिक क्रान्ति के फलस्वरूप विश्व के नये-नये अविष्कारों को प्रोत्साहन मिला।

(3) विश्व के मानव के सुख-सुविध शाओं में वृद्धिः- औद्योगिक क्रान्ति से माल सस्ता और अधिक मात्रा में प्राप्त होने लगा । इससे मनुष्य की सुख सुविधा में वृद्धि हुई है।

(4) विश्व के विभिन्न देशों के बीच आपसी आर्थिक संबंधों की स्थापना हुई है।

(5) परिवहन तथा संचार के साधनों का समुचित विकास:- रेल, सड़क, वायु तथा जल यातायात के साधनों ने विश्व की दूरी को बहुत कम कर दिया है। तार, टेलीफोन, डाक आदि संचार के साधनों से विश्व के लोग एक दूसरे के नजदीक आए हैं।

(6) व्यापार तथा कृषि में क्रान्ति: औद्योगिक क्रान्ति के कारण कृषि में अच्छे बीच, खाद एवं नये कृषि उपकरणों का प्रयोग होने लगा। जिससे कृषि पैदावार में वृद्धि हुई और फसलों के व्यापार में वृद्धि हुई। 1 (7) विश्व एकता का आदर्श: औद्योगिक क्रान्ति ने परिवहन और संचार के साधनों का विकास करके सम्पूर्ण संसार को एकता के में बांध दिया है।

 


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