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Digestive glands | How many types of digestive glands are there?


{ Digestive glands  in Hindi  }


पाचक ग्रंथियाँ (Digestive glands) | पाचक ग्रंथियाँ  कितने  प्रकार की होती  है ? -  GOES

पाचक ग्रंथियाँ 


पाचक ग्रंथियाँ (Digestive glands)

{ Digestive glands  in Hindi  }

पाचक ग्रंथियाँ (Digestive glands) आहरनाल से संबंधित उन ग्रंथियों को जो भोजन के पाचन में सहायता करती हैं, पाचक ग्रंथिया कहलाती है।

     मानव में दो प्रकार के पाचक ग्रंथियों उपस्थित रहती है


    (1) आन्तरिक ग्रन्थियों

    (2) बाह्य ग्रंथियाँ

    आन्तरिक ग्रंथियाँ 

    (Internal Glands )

    { Digestive glands  in Hindi  }

    इस प्रकार की पाचक ग्रंथियाँ (Digestive glands) आहारनाल की दीवार में पायी जाती हैं- जो कि सम्पूर्ण आहारनाल में स्थित श्लेष्मा ग्रंथियाँ आमाशय की दीवार की जठर ग्रंथियाँ (Gastric Glands) तथा आँत की दीवार में उपस्थित आंत्र अथवा ब्रूनर्स या लीवर कुन (Intestinal or Brunner's or liberkuhn )  ग्रंथिया होती हैं। ये ग्रंथियों एक या कई कोशिकाओं के समूह की बनी होती है और अपने स्त्राव को सीधे आहारनाल की गुहा में छोड़ती है।

    ब्राह्म ग्रंथियाँ 

    (External Glands) 

    इस प्रकार की ग्रंथियों आहार नाल के बाहर में स्थित होती है तथा ग्रंथिल उपकला ऊतक की बनी होती है जो कि अपने द्वारा स्त्रावित पदार्थों को नलिकाओं द्वारा आहार नाल की गुहा में पहुचा देती हैं।

    (1) लार ग्रंथियाँ (Salavary Glands

     मनुष्य में तीन प्रकार की लार ग्रंथियों पायी जाती है

    (1) सबलिंग्वल ग्रंथियाँ

    (2) सब मैक्सिलरी ग्रंथियों

    (3) पैरोटिड ग्रंथियों  लार ग्रंथियों से स्रावित लार में टायेलिन एवं लाइसोजाइम एन्जाइम होते हैं जो क्रमशः स्टार्च को माल्टोज में बदल देता है तथा जीवाणुओं की कोशिका भित्ति पर आक्रमण करके उन्हे नष्ट करने का कार्य करता है।

     

    (2) यकृत (Liver) 

    यकृत मानव शरीर की सबसे बड़ी पाचक ग्रंथि है जो कि यकृत कोशिकाओं द्वार एक विशिष्ट द्रव का स्त्रावण करती हैं जिसे पित्त रस (Bile juice) कहते हैं इसे पित्ताशय में एकत्रित किया जाता है यह भोजन के हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करता है साथ ही साथ पाचन में भी सहायता करता है।

    (3) अग्नाशय (Pancreas) 

    यह एक गुलाबी रंग की दूसरी बड़ी पाचक ग्रंथि है इसके द्वारा अग्नाशयी रस स्त्रावित किया जाता है जो भोजन के पाचन में सहायता करता हैं।

     पाचन प्रक्रिया 

    (Digestion Process)

    पाचक ग्रंथियाँ (Digestive glands) के द्वारा स्त्रावित पदार्थ एवं एन्जाइम की सहायता से भोजन में उपस्थित जटिल कार्बनिक पदार्थों को जल अपघटन प्रक्रिया के द्वारा सरल पदार्थों में परिवर्तित करके आहारनाल की कोशिकाओं द्वारा अवशोषण करना ही पाचन प्रक्रिया कहलाती है।

    पाचन की क्रिया मुख से प्रारंभ होती है इसमें उपस्थित दाँतों की सहायता से भोजन को भलीभांति चबाते हैं फिर जिव्हा में उपस्थित लार ग्रंथि द्वारा स्रावित एन्जाइम्स मंड का आंशिक पाचन करते हैं इस तरह चबाया गया भोजन ग्रसिका से होता हुआ आमाशय में पहुँचता है। आमाशय द्वारा स्त्रावित जठर रस प्रोटीन एवं वसा को छोटे-छोटे अणुओं में तोड़ देते हैं। तत्पश्चात भोजन छोटी आंत में पहुँचता हैं। ग्रहणी, जो कि छोटी आंत्र का अगला भाग होती है

    जिसमें कि अग्नाशय द्वारा स्रावित अग्नाशयी रस एवं यकृत से आये पित्तरस द्वारा भोजन पर रासायनिक क्रिया होती है। एन्जाइम भोजन में उपस्थित प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट और वसा का पूर्ण पाचन करने में सक्षम होते हैं। छोटी आंत्र का पिछला भाग जो इलियम कहलाता है, उसमें उपस्थित विलाई पाचित भोजन का अवशोषण करती है। तथा अपच शेष भोज्य पदार्थ को बड़ी आंत्र (मलाशय) द्वार बहिक्षेपण कर दिया जाता है।


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